महाराष्ट्र निकाय चुनावों में बड़े पैमाने पर निर्विरोध जीत के बाद राज्य चुनाव आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने नया नियम बनाते हुए कहा कि किसी भी उम्मीदवार के निर्विरोध चुनाव पर पूरी रिपोर्ट आयोग को सौंपी जाएगी।

नया नियम क्यों लाया गया?

महाराष्ट्र में हाल के स्थानीय निकाय चुनावों के दौरान कई उम्मीदवारों ने नामांकन वापस ले लिया, जिससे एकमात्र बचे उम्मीदवार निर्विरोध जीत गए। आयोग ने इसे संदिग्ध बताते हुए निर्देश जारी किया कि नाम वापसी के बाद यदि केवल एक उम्मीदवार शेष रहता है, तो दबाव की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। इसलिए स्थानीय अधिकारियों को विस्तृत रिपोर्ट तत्काल आयोग भेजनी होगी।

रिपोर्ट के बाद ही होगा परिणाम घोषित

आयोग के आदेश के अनुसार, स्थानीय स्वराज्य संस्था चुनावों में नामांकन प्रक्रिया शुरू में कई उम्मीदवार दाखिल करते हैं, लेकिन अंतिम समय पर सभी एक को छोड़कर वापस ले लेते हैं। ऐसी स्थिति में निर्विरोध घोषणा से पहले आयोग की अनुमति अनिवार्य होगी। यह नियम राज्य के सभी महानगरपालिका आयुक्तों और कलेक्टरों को भेजा गया है।

भाजपा के 68 नेताओं पर असर

इस नए नियम से भाजपा के 68 नेताओं के निर्विरोध चुनाव प्रभावित हो सकते हैं, क्योंकि महाराष्ट्र निकाय चुनावों में भाजपा समर्थित कई उम्मीदवारों को इसी तरह फायदा हुआ था। आयोग ने स्पष्ट किया कि भविष्य में ऐसी किसी भी घटना पर तुरंत जांच होगी।

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