नई दिल्ली, 4 जनवरी 2026: 2026 के पहले ही हफ्ते में सोने की कीमतों में करीब 5% की जोरदार गिरावट देखने को मिली। शुक्रवार को सोना 4,332 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुआ, जो दो हफ्ते के निचले स्तर पर था। यह गिरावट छुट्टियों के दौरान पतली ट्रेडिंग और मुनाफावसूली से जुड़ी बताई जा रही है।
2025 की ऐतिहासिक तेजी के प्रमुख कारण
2025 सोने के लिए रिकॉर्ड वाला साल साबित हुआ, जब इसकी कीमतें 65% चढ़कर 4,584 डॉलर प्रति औंस के ऑल-टाइम हाई पर पहुंचीं। इस रैली को बढ़ावा मिला सेंट्रल बैंकों की भारी खरीदारी से, जिन्होंने अक्टूबर तक 687 टन सोना जमा किया। फेडरल रिजर्व की 75 बेसिस पॉइंट्स की दर कटौती, भू-राजनीतिक तनाव और ETF में भारी निवेश ने भी कीमतों को रॉकेट की तरह उछाला।
तकनीकी संकेत बुलिश ट्रेंड की ओर इशारा
हालांकि साप्ताहिक गिरावट तेज रही, लेकिन सोना अभी भी 50-दिन के मूविंग एवरेज (4,247 डॉलर) से ऊपर कारोबार कर रहा है। RSI इंडिकेटर न्यूट्रल जोन (57.7) में है, जो न तो ओवरबॉट है और न ही ओवरसोल्ड। जानकार इसे हेल्दी कंसोलिडेशन मान रहे हैं, न कि ट्रेंड रिवर्सल।
2026 के लिए बड़े बैंकों के टारगेट
ये अनुमान सेंट्रल बैंकों की मासिक 80 टन खरीद, आगे की दर कटौती और जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता पर आधारित हैं। हालांकि कुछ विश्लेषक 2026 को कंसोलिडेशन ईयर मानते हैं, अगर ब्याज दरें टाइटनिंग की ओर मुड़ें।
कम लिक्विडिटी वाली छुट्टियों के बाद बाजार सामान्य होने पर सोने का रुख साफ होगा। भारतीय निवेशक MCX पर नजर रखें, जहां रुपये की कमजोरी अतिरिक्त बूस्ट दे सकती है।
