नई दिल्ली, 4 जनवरी 2026: डायबिटीज और वजन घटाने की दुनिया की ब्लॉकबस्टर दवा सेमाग्लुटाइड के जेनेरिक पेटेंट मार्च 2026 में खत्म होने से भारतीय दवा कंपनियों के सामने 50 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का सुनहरा अवसर खुल गया है. सिस्टमैटिक्स इंस्टीट्यूशनल रिसर्च की रिपोर्ट के मुताबिक, अगले 12-15 महीनों में भारत, कनाडा, ब्राजील जैसे बाजारों से यह कमाई होगी.

भारतीय दिग्गज तैयार, Q1 FY27 में लॉन्च: 

अल्केम लैब्स, डॉ. रेड्डीज़ और सन फार्मा को भारत के ड्रग रेगुलेटर से जेनेरिक सेमाग्लुटाइड बनाने की मंजूरी मिल चुकी है. जाइडस लाइफसाइंसेज सिंगल-पेन डिवाइस वाली नई वैरायटी ला रही है, जो कॉम्पिटिशन में आगे रखेगी. बायोकॉन और वनसोर्स जैसी कंपनियां भी पार्टनरशिप से फायदा उठाएंगी.​

कीमतें 70% तक गिरेंगी, अपनाव बढ़ेगा: 

शुरुआत में 30-50% सस्ती जेनेरिक दवाएं बाजार में आएंगी, बाद में 70-75% तक गिरावट संभव. इससे GLP-1 थेरेपी का इस्तेमाल तेज होगा और भारतीय फार्मा मार्केट FY27 में 0.5-1% बढ़ेगा. कनाडा-ब्राजील में $2 अरब के बाजार से $500 मिलियन का हिस्सा भारतीय जेनेरिक्स को मिल सकता है.

कौन बनेगा सबसे बड़ा फायदा उठाने वाला? 

10-15 कंपनियां इस रेस में हैं, लेकिन मजबूत डायबिटीज पोर्टफोलियो वाली कंपनियां जैसे सन फार्मा और डॉ. रेड्डीज़ आगे रहेंगी. सहायक कंपनियां जैसे शaily इंजीनियरिंग को पेन इंजेक्शन डिवाइस की डिमांड बढ़ेगी. निवेशक इन स्टॉक्स पर नजर रखें.

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