पिछले कुछ सालों में भारत का टीवी इंडस्ट्री वैसा नहीं रहा जैसा हम बचपन में देखते थे। अब दर्शक तेजी से OTT, YouTube और शॉर्ट वीडियो प्लेटफॉर्म की ओर जा रहे हैं, जिसके बीच में करीब 50 भारतीय टीवी चैनल ने अपना ब्रॉडकास्ट लाइसेंस सरेंडर कर दिया है।


किन ब्रॉडकास्टर्स ने छोड़ा TV चैनल?

रिपोर्ट्स के मुताबिक कई बड़े मीडिया हाउस ने अपने कुछ चैनलों के लाइसेंस वापिस कर दिए हैं। इनमें खास तौर पर ये नाम शामिल हैं:

  • JioStar – कुछ एंटरटेनमेंट और म्यूज़िक चैनल बंद या मर्ज किए गए।
  • Zee Entertainment Enterprises – चुनिंदा चैनलों के लाइसेंस छोड़कर पोर्टफोलियो को स्लिम किया।
  • Eenadu Television और TV Today Network – क्षेत्रीय और न्यूज़ सेगमेंट में रीस्ट्रक्चरिंग।
  • NDTV और ABP Network – कुछ प्रस्तावित या कमज़ोर परफॉर्म करने वाले चैनल ड्रॉप किए गए।

इसके अलावा Sony की पेरेंट कंपनी Culver Max Entertainment ने भी 26 डाउनलिंकिंग परमिशन सरेंडर की हैं, ताकि वही चैनल नए मॉडल के तहत अपलिंक-डाउनलिंक कर सके।


ऑपरेशन क्यों घटा रहे हैं ब्रॉडकास्टर्स?

टीवी चैनल बंद करने की मजबूरी सिर्फ एक वजह से नहीं, बल्कि कई कारणों का कॉम्बिनेशन है।

  • व्यूअरशिप शिफ्ट: अमीर घर OTT (Netflix, JioCinema, Amazon Prime आदि) की तरफ, जबकि मिड-लोअर सेगमेंट DD Free Dish जैसे फ्री-टू-एयर प्लेटफॉर्म पर शिफ्ट हो रहा है।
  • पेटीवी सब्सक्राइबर गिरावट: Pay DTH का बेस FY19 के 7.2 करोड़ से FY24 में 6.2 करोड़ तक आ चुका है और आगे 5.1 करोड़ से नीचे जाने का अनुमान है।
  • एड रेवेन्यू प्रेशर: टीवी एडवरटाइजिंग रेवेन्यू 2025 में करीब 1.5% गिरकर लगभग ₹47,740 करोड़ तक रहने का अनुमान है, जबकि ओवरऑल एड मार्केट लगभग ₹1.8 ट्रिलियन तक बढ़ रहा है।
  • हाई ऑपरेटिंग कॉस्ट: न्यूज़ और एंटरटेनमेंट चैनल चलाने की लाइसेंस, ट्रांसपोंडर, स्टूडियो, स्टाफ और डिस्ट्रीब्यूशन कॉस्ट लगातार बढ़ रही है।

कई ब्रॉडकास्टर्स अब वही चैनल छोड़ रहे हैं जहां रेवेन्यू और फ्यूचर ग्रोथ की संभावना कम दिख रही है।


Pay TV का भविष्य: क्या TV सच में खत्म हो रहा है?

ये बदलाव इस बात का संकेत हैं कि भारत में Pay TV एक ब्रेकिंग पॉइंट पर पहुंच चुका है।

  • DTH और केबल की जगह अब कनेक्टेड TV + OTT बंडल नया फॉर्मेट बन रहा है।
  • DD Free Dish के 5 करोड़ से ज्यादा घरों तक पहुंचने से लो-इनकम सेगमेंट ने पे चैनलों की जरूरत कम कर दी है।
  • OTT मार्केट लगभग 4.5 बिलियन डॉलर तक पहुंच चुका है और 600 मिलियन से ज्यादा व्यूअर्स OTT कंटेंट देखते हैं।

इसका मतलब ये नहीं कि टीवी कल से गायब हो जाएगा, लेकिन ग्रोथ अब साफ तौर पर डिजिटल की तरफ शिफ्ट हो चुकी है।


कंटेंट क्रिएटर्स और मार्केटर्स के लिए बड़ा मौके

अगर आप कंटेंट क्रिएटर, एडवरटाइजर या डिजिटल मार्केटर हैं, तो ये पूरा बदलाव आपके लिए मौका है।

  • ब्रांड अब टीवी से बजट निकालकर OTT और डिजिटल वीडियो पर ज्यादा स्पेंड कर रहे हैं।
  • रीजनल लैंग्वेज कंटेंट की डिमांड OTT पर बूम पर है, जो पहले छोटे TV चैनलों तक सीमित रहती थी।
  • CTV (Smart TV + Internet) ऑडियंस पर टारगेटेड एड्स रन करना आसान और डेटा-ड्रिवन हो चुका है।

जो क्रिएटर जल्दी डिजिटल की तरफ शिफ्ट होकर क्वालिटी कंटेंट, SEO और डिस्ट्रीब्यूशन पर फोकस करेंगे, उनके लिए ये गोल्डन पीरियड साबित हो सकता है।

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